सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जीवन परिचय भाव पक्ष कला पक्ष साहित्य में स्थान पाठ 7 कक्षा 12. Suryakant Tripathi Nirala jivan Parichay bhav paksh Kalapaksh sahitya mein sthan paath 7 class 12th

 

           •जीवनपरिचय-

छायावाद के प्रमुख स्तम्भ और आधुनिक काव्य में क्रान्ति के अग्रदूत सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म मेदिनीपुर (बंगाल) के महिषादल राज्य में सन् 1899 में हुआ था। इनके पिता रामसहाय त्रिपाठी महिषादल राज्य के कर्मचारी थे। इनकी स्कूली शिक्षा केवल मैट्रिक तक हुई। कालान्तर में उन्होंने हिंदी, संस्कृत, उर्दू तथा अंग्रेजी भाषा तथा साहित्य का बहुत अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया। निरालाजी का जीवन दुःख और संघर्षों में ही बीता। जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने कलकत्ता में रामकृष्ण आश्रम में रहकर 'समन्वय' का कार्य किया। मतवाला (कलकत्ता) एवं सुधा (लखनऊ) का सम्पादन किया। 15 अक्टूबर, 1961 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में इनका स्वर्गवास हो गया।

• रचनाएँ - इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

(1) कविता संग्रह- 'अनामिका', 'परिमल', 'गीतिका', 'बेला', 'नए पत्ते',

'अणिमा', 'तुलसीदास', 'कुकुरमुत्ता', 'सरोज-स्मृति', 'राम की शक्ति पूजा', 'राग विराग',

'अर्चना', 'आराधना' ।

(2) गद्य-साहित्य-'चतुरी चमार', 'प्रभावती', 'बिल्लेसुर बकरिहा', 'चोरी की पकड़', 'काल कारनामे'।

(3) रेखाचित्र - 'कुल्ली भाट'।

(4) निबन्ध-संग्रह-'प्रबन्ध पद्य', 'प्रबन्ध प्रतिमा', 'चाबुक', 'प्रबन्ध परिचय', 'रवि

कविता कानन'।

(5) जीवनियाँ- 'ध्रुव', 'भीष्म', 'राणा प्रताप'।

(6) अनुवाद- 'आनन्द पाठ', 'कपाल कुंडला', 'चन्द्रशेखर', 'दुर्गेश नन्दिनी', ‘रजनी’, ‘देवी’, ‘चौधरानी', 'राधारानी', 'विष वृक्ष', 'राजा सिंह', 'कृष्णकान्त का दिल', 'महाभारत', 'युग लांगुलीय' ।

(7) सम्पादन- 'समन्वय', 'मतवाला' पत्रिका।

(8) संग्रह-‘निराला रचनावली' (आठ खण्डों में प्रकाशित) ।



'राम की शक्ति पूजा', 'तुलसीदास' उनकी लम्बी कविताएँ हैं, जो अपनी विशिष्टताओं के कारण खण्डकाव्य मानी गई हैं। 'सरोज स्मृति' हिंदी का सर्वश्रेष्ठ शोकगीत माना गया है।

            भावपक्ष- 

(1) प्रेम और सौन्दर्य-छायावाद के उन्नायक कवि होने के कारण निराला के काव्य में प्रेम तथा सौन्दर्य के मोहक चित्र प्राप्त होते हैं। उनका सौन्दर्य चित्रण आकर्षक एवं अद्भुत है।

निराला के काव्य में श्रृंगार के मादक एवं सजीव चित्र भी प्राप्त होते हैं। (2) राष्ट्रीयता - निराला जी का काव्य देश-प्रेम और राष्ट्रीयता की भावनाओं से ओतप्रोत है। उनकी कविताओं में ओज स्पष्ट दिखाई देता है।

(3) भक्ति एवं रहस्य भावना-निराला जी के काव्य में भक्ति एवं रहस्य, भावनापरक रचनाएँ भी प्राप्त होती हैं। उन्होंने आत्मा तथा परमात्मा की एकता का प्रतिपादन किया है। निराला जी की भक्तिपरक रचनाओं में सगुण भक्तों का सा आत्मसमर्पण, तल्लीनता तथा हृदय की आर्त भावना परिलक्षित होती हैं।

(4) प्रकृति चित्रण- निराला जी के काव्य में प्रकृति चित्रण के विविध रूप प्राप्त होते हैं। उनका प्रकृति चित्रण अत्यन्त मधुर और सजीव है। उन्होंने प्रकृति में मानवीय भावों तथा क्रिया-कलापों का आरोप किया है।

(5) प्रगतिवादी दृष्टिकोण-छायावाद का कवि होते हुए भी निराला जी को प्रगतिवाद का भी प्रथम कवि माना जाता है। उनके काव्य में सामाजिक तथा आर्थिक विषमता के प्रति विद्रोह तथा समाज के दलित एवं शोषित वर्ग के प्रति करुणा का भाव है। निम्न वर्ग के जीवन- को उन्होंने यथा तथ्य चित्रण किया है।

          • कलापक्ष - 

(1) भाषा - निराला जी की भाषा भावों के अनुरूप है। देश-प्रेम तथा भक्तिपरक व्यंग्यात्मक कविताओं में उनकी भाषा सरल एवं व्यावहारिक है। गम्भीर रचनाओं में उनकी भाषा क्लिष्ट, संस्कृतनिष्ठ एवं दुरूह हो गई है। निराला जी की भाषा में उर्दू, फारसी एवं बंगला शब्द भी प्रयुक्त हुए हैं। निराला जी की काव्य भाषा भावानुकूल, चित्रात्मक, गत्यात्मक तथा ध्वन्यात्मक गुणों से समन्वित है।

(2) शैली- निराला जी की दो शैलियाँ हैं- (i) उत्कृष्ट छायावादी गीतों में प्रयुक्त दुरूह शैली। (ii) सरल, प्रवाहपूर्ण, प्रचलित उर्दू के शब्द लिए व्यंग्यपूर्ण और चुटीली शैली।

(3) अलंकार-योजना-निराला जी की अलंकार योजना उच्चकोटि की है। उनके काव्य में अलंकारों की प्रचुरता है। उन्होंने उपमा, उत्प्रेक्षा, रूपक, मानवीकरण, विशेषण, विपर्यय, पुनरुक्तिप्रकाश आदि अलंकारों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया है।

(4) छंद-योजना- निराला जी ने नए-नए छंदों का प्रयोग किया है। उन्होंने तुकान्त और अतुकान्त दोनों प्रकार के छंद लिखे हैं। निराला जी 'मुक्त छंद' के प्रवर्तक माने जाते हैं। मुक्त छंद में मात्राओं तथा वर्णों का बन्धन नहीं होता। केवल ध्वनि तथा प्रवाह का ध्यान रखा जाता है।

• साहित्य में स्थान- आधुनिक कवियों में निराला का उत्कृष्ट स्थान है। वे मुक्तक के जनक थे। उन्होंने हिंदी कविता को नयी दिशा प्रदान की। हिंदी साहित्य में निराला के कृतित्व को उनके व्यक्तित्व ने और भी अधिक महान बनाया है।

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